हरदोई: गोवध अधिनियम के 27 साल पुराने मामले में फैसला, दोषी को 3 साल की सजा
विमलेश सिंह • भारत, हरदोई • 18/10/2026, 10:37:29 am
छह बैलों को कटान के लिए ले जाने का था आरोप, अदालत ने दोषी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया; दो आरोपियों की हो चुकी है मौत
हरदोई। गोवध निवारण अधिनियम के तहत दर्ज 27 साल पुराने मामले में अदालत ने फैसला सुनाते हुए एक आरोपी को तीन साल के कारावास की सजा सुनाई है। सिविल जज जूनियर डिवीजन एफटीसी महिला विशाल दीक्षित की अदालत ने दोषी बन्ने पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर उसे छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। इस मामले में नामजद तीन आरोपियों में से दो की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है।
1999 में पकड़े गए थे छह बैल
मामले के अनुसार, शिवसेना से जुड़े अवनीश श्रीवास्तव विद्रोही ने 19 दिसंबर 1999 को घटना के संबंध में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया था कि बघौली पशु नखासे के पास पावर हाउस के सामने छह वृद्ध बैलों को ले जा रहे तीन लोगों को पकड़ा गया था। आरोप था कि शाहजहांपुर जिले के कांट थाना क्षेत्र के रावतपुर निवासी नसीर बंजारा और शराफत बंजारा तथा माधौगंज क्षेत्र के हीरा रोशनपुर निवासी बन्ने बैलों को कटान के लिए शाहजहांपुर के कांट ले जा रहे थे।
शिकायत के आधार पर तीनों आरोपियों के खिलाफ उत्तर प्रदेश गोवध निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था।
चार गवाहों के बयान बने आधार
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में चार गवाह पेश किए। वहीं, बचाव पक्ष ने गवाहों के बयानों में विरोधाभास, स्वतंत्र गवाहों की कमी और आरोपी को झूठा फंसाए जाने का तर्क दिया।
अदालत ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का परीक्षण किया। न्यायालय ने माना कि घटना और गवाही के बीच लगभग 27 साल का लंबा अंतर होने के कारण बयानों में मामूली विरोधाभास होना स्वाभाविक है। साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने माना कि बैलों को कटान के उद्देश्य से ले जाया जा रहा था और उनके परिवहन के लिए आवश्यक प्रमाणपत्र भी उपलब्ध नहीं था।
दो आरोपियों की मौत, तीसरे को सजा
मुकदमे की सुनवाई के दौरान नसीर बंजारा और शराफत बंजारा की मौत हो गई थी। इसके बाद मामले में शेष आरोपी बन्ने के खिलाफ सुनवाई जारी रही। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने बन्ने को उत्तर प्रदेश गोवध निवारण अधिनियम के तहत दोषी ठहराते हुए तीन साल के कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं देने पर छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।