रक्षा मंत्रालय का बड़ा फैसला: तीनों सेनाओं के लिए ₹2.12 लाख करोड़ के रक्षा प्रस्तावों को मंजूरी
संपादकीय डेस्क • मुख्यालय, नई दिल्ली • 26/10/2026, 7:54:54 pm
नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में 26 अक्टूबर को हुई डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) की बैठक में भारतीय थल सेना, नौसेना और वायु सेना के लिए लगभग 2.12 लाख करोड़ रुपये के पूंजी अधिग्रहण प्रस्तावों को आवश्यकता की स्वीकृति (AoN) प्रदान की गई। इन प्रस्तावों के तहत करीब 82 प्रतिशत खरीद भारतीय उद्योगों से किए जाने की उम्मीद है।
बैठक में सैन्य क्षमता बढ़ाने के लिए तोप प्रणाली, हेलीकॉप्टर, ड्रोन, वायु रक्षा उपकरण, निगरानी प्रणाली, नौसैनिक मिसाइल रक्षा तकनीक और मौसम संबंधी रडार सहित कई आधुनिक उपकरणों की खरीद को मंजूरी दी गई।
थल सेना की मारक क्षमता और निगरानी होगी मजबूत
भारतीय थल सेना के लिए हाई मोबिलिटी व्हीकल, सेल्फ-प्रोपेल्ड ट्रैक्ड गन सिस्टम, गन शॉट रिस्पॉन्स सिस्टम, हल्के मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर और बहुत कम दूरी की वायु रक्षा प्रणालियों की खरीद को मंजूरी दी गई है।
इसके अलावा काउंटर-ड्रोन सिस्टम, निगरानी UAV, इंटीग्रेटेड सर्विलांस एंड स्ट्राइक सिस्टम तथा लंबी दूरी के कामिकेज़ ड्रोन सिस्टम भी प्रस्तावों में शामिल हैं। इन उपकरणों से सेना की आवाजाही, मारक क्षमता, युद्धक्षेत्र की निगरानी और हवाई खतरों से निपटने की क्षमता को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
नौसेना को मिलेगी मिसाइल हमलों से सुरक्षा
भारतीय नौसेना के लिए आधुनिक एंटी-शिप मिसाइलों से बचाव को बेहतर बनाने के उद्देश्य से एक्टिव ऑफबोर्ड डिकॉय सिस्टम की खरीद को मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही नौसेना की युद्धक क्षमताओं को बढ़ाने के लिए स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित अन्य नौसैनिक प्लेटफॉर्मों की खरीद को भी स्वीकृति दी गई।
वायु सेना के लिए हेलीकॉप्टर और आधुनिक रडार
भारतीय वायु सेना के लिए हेलीकॉप्टर, वायु रक्षा प्रणालियों, हथियारों और मोबाइल एक्स-बैंड डॉपलर वेदर रडार सिस्टम की खरीद को मंजूरी मिली है। स्पेशल यूटिलिटी हेलीकॉप्टर हवाई परिवहन में मदद करेंगे, जबकि मौसम संबंधी रडार अग्रिम क्षेत्रों में स्थानीय मौसम की निगरानी में उपयोगी होंगे।
हल्के मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर थल सेना और वायु सेना, दोनों के लिए उपयोगी होंगे।
स्वदेशी रक्षा उद्योग पर जोर
DAC के इन फैसलों में घरेलू रक्षा उत्पादन को प्राथमिकता दी गई है। प्रस्तावित खरीद का लगभग 82 प्रतिशत हिस्सा भारतीय उद्योगों से प्राप्त होने की उम्मीद है। इससे देश के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहन मिलने और आधुनिक सैन्य उपकरणों की उपलब्धता बढ़ने की संभावना है।