युवा पीढ़ी पर नशे का बढ़ता साया, समाज और राष्ट्र के भविष्य के लिए गंभीर चुनौती
आचार्य संजीव कुमार मिश्रा • बरेली, बरेली • 27/10/2026, 3:16:16 pm
नशे की गिरफ्त में सिमटते सुनहरे सपने, परिवारों की खुशियों पर संकट; जागरूकता और सामूहिक प्रयास से ही बनेगा नशामुक्त समाज
बरेली मुरादाबाद जिस युवा शक्ति के कंधों पर देश के उज्ज्वल भविष्य का भार है, आज वही युवा पीढ़ी नशे के बढ़ते जाल में उलझती जा रही है। नशे की लत केवल किसी व्यक्ति के शरीर और स्वास्थ्य को ही नहीं खोखला करती, बल्कि उसके सपनों, रिश्तों, परिवार की खुशियों और अंततः पूरे समाज की नींव को प्रभावित करती है। आधुनिक जीवनशैली और बदलते सामाजिक परिवेश के बीच किशोरों एवं युवाओं में नशीले पदार्थों के सेवन की प्रवृत्ति चिंता का विषय बनती जा रही है।
आज अनेक युवा व्हाइटनर सूंघने, भांग, गांजा, चरस, धूम्रपान तथा नशीली दवाओं के इंजेक्शन जैसे खतरनाक माध्यमों के जरिए नशे की गिरफ्त में पहुंच रहे हैं। शुरुआत अक्सर जिज्ञासा, मित्रों के दबाव या शौक के रूप में होती है, लेकिन धीरे-धीरे यही आदत ऐसी जंजीर बन जाती है, जिसे तोड़ना व्यक्ति के लिए बेहद कठिन हो जाता है। नशा धीरे-धीरे युवा की इच्छाशक्ति, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक प्रतिष्ठा को निगलने लगता है।
नशे का प्रभाव केवल उस व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। एक युवा जब नशे का शिकार होता है तो उसके साथ उसके माता-पिता, भाई-बहन और पूरा परिवार मानसिक पीड़ा से गुजरता है। घर की खुशियां धीरे-धीरे तनाव में बदल जाती हैं और आपसी विश्वास कमजोर होने लगता है। यही कारण है कि नशाखोरी को केवल व्यक्तिगत समस्या न मानकर सामाजिक एवं राष्ट्रीय चुनौती के रूप में देखने की आवश्यकता है।
नशे का दुष्प्रभाव समाज के विभिन्न क्षेत्रों में भी दिखाई देता है। नशे की हालत में होने वाले विवाद, मारपीट, आपराधिक घटनाएं, सड़क दुर्घटनाएं तथा अन्य सामाजिक विकृतियां चिंता को और गंभीर बना देती हैं। विशेष रूप से विद्यालयों और महाविद्यालयों के आसपास नशीले पदार्थों की उपलब्धता एवं इनके प्रति बढ़ता आकर्षण आने वाली पीढ़ी के लिए गंभीर खतरे का संकेत है।
अभिभावकों की सजगता बन सकती है सुरक्षा की पहली दीवार
इस चुनौती से निपटने में परिवार की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। अभिभावकों को अपने बच्चों के व्यवहार, मित्र मंडली, रहन-सहन, दिनचर्या तथा अचानक होने वाले व्यवहारिक परिवर्तनों पर संवेदनशीलता के साथ नजर रखनी चाहिए। बच्चों के साथ संवाद की ऐसी मजबूत डोर कायम करनी होगी, जिसमें वे अपनी समस्याएं बिना भय और संकोच के माता-पिता से साझा कर सकें।
जो युवा नशे की गिरफ्त में आ चुके हैं, उन्हें तिरस्कार या कठोरता से नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और सहयोग के साथ मुख्यधारा में वापस लाने का प्रयास किया जाना चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञों एवं नशा मुक्ति केंद्रों की सहायता लेकर उन्हें उपचार और परामर्श उपलब्ध कराया जाना चाहिए। किसी भटके हुए युवा को सिर्फ दोषी मान लेने के बजाय उसे दोबारा जीवन की सकारात्मक राह दिखाना ही समाज की वास्तविक संवेदनशीलता है।
सामूहिक जागरूकता से ही टूटेगा नशे का जाल
नशाखोरी के विरुद्ध केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। समाज के बुद्धिजीवियों, शिक्षकों, अभिभावकों, सामाजिक संगठनों, स्वैच्छिक संस्थाओं और युवाओं को एकजुट होकर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है। विद्यालयों और महाविद्यालयों में नशे के दुष्परिणामों को लेकर नियमित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए।
इसके साथ ही नशीले पदार्थों के अवैध व्यापार और युवाओं तक उनकी पहुंच को रोकने के लिए प्रभावी एवं कठोर कार्रवाई भी आवश्यक है। समाज को यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारे बच्चों के हाथों में नशे का जहर नहीं, बल्कि शिक्षा, संस्कार, रोजगार और सपनों की उड़ान हो।
युवा किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति होते हैं। यदि यह शक्ति नशे की अंधेरी सुरंग में खो गई तो राष्ट्र के विकास की गति प्रभावित होना स्वाभाविक है। इसलिए आज आवश्यकता है कि हम सब मिलकर युवाओं के जीवन में उम्मीद, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच का प्रकाश जलाएं।
आइए, हम संकल्प लें कि नशे को अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के भविष्य पर हावी नहीं होने देंगे। सामूहिक जागरूकता, पारिवारिक संस्कार, सामाजिक सहयोग और प्रभावी कार्रवाई के माध्यम से ही हम एक स्वस्थ, सशक्त और नशामुक्त समाज की नींव रख सकते हैं।