ट्रिपल मर्डर से दहला लखनऊ: डिप्टी सीएम ने दिया कंधा, मामूली विवाद में चली गोली
संपादकीय डेस्क • मुख्यालय, लखनऊ • 27/10/2026, 9:29:07 pm
लखनऊ। राजधानी लखनऊ के सआदतगंज इलाके में बरगद के पेड़ के चबूतरे और कार पार्किंग को लेकर शुरू हुआ विवाद तीन लोगों की हत्या तक पहुंच गया। सोमवार सुबह हुई इस वारदात में शिवाजी तिवारी, उनके बेटे शिवेंद्र तिवारी और सुयश तिवारी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया। पोस्टमार्टम के बाद जब तीनों के शव घर पहुंचे तो परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। लोगों ने विरोध प्रदर्शन कर आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। इस बीच डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे और अंतिम संस्कार के दौरान मृतकों को कंधा भी दिया। अब पुलिस ने मुख्य आरोपी ऋषभ शुक्ला समेत छह वांछित अभियुक्तों को गिरफ्तार करने की जानकारी दी है।
बरगद के चबूतरे और पार्किंग को लेकर शुरू हुआ विवाद
जानकारी के मुताबिक, सआदतगंज के ब्राह्मण टोला इलाके में बरगद के पेड़ के नीचे बने चबूतरे और कार पार्किंग को लेकर विवाद चल रहा था। इसी बात को लेकर सोमवार सुबह विवाद बढ़ गया। आरोप है कि विवाद के दौरान ऋषभ शुक्ला ने गोलीबारी कर तीन लोगों की हत्या कर दी।
इस घटना में शिवाजी तिवारी (62), उनके भाई शिवेंद्र तिवारी और सुयश तिवारी की जान चली गई। मामूली दिखने वाले विवाद का इस तरह जानलेवा वारदात में बदल जाना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया।
कौन थे तीनों मृतक?
शिवाजी तिवारी सचिवालय के सेवानिवृत्त कर्मचारी थे। वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) में जिला स्तर पर पदाधिकारी भी रह चुके थे। उनके बेटे शिवेंद्र तिवारी लखनऊ विश्वविद्यालय में कार्यरत थे, जबकि सुयश तिवारी बिजली के सामान का कारोबार करते थे।
परिवार में सुयश की शादी 5 दिसंबर को होनी थी। घर में शादी की तैयारियों का माहौल होना था, लेकिन इस वारदात ने परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया।
पोस्टमार्टम के बाद शव घर पहुंचे तो मचा कोहराम
तीनों मृतकों के शव पोस्टमार्टम के बाद जब घर पहुंचे तो परिजनों में चीख-पुकार मच गई। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल था। इस दौरान स्थानीय लोगों में भी भारी आक्रोश देखने को मिला।
लोगों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए ‘बुलडोजर शासन’ को लेकर नारेबाजी की और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई। परिवार ने न्याय और सुरक्षा की मांग की।
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने पीड़ित परिवार को दिया भरोसा
घटना के बाद डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे। उन्होंने परिजनों को सांत्वना दी और सरकार की ओर से सहायता का भरोसा दिलाया।
डिप्टी सीएम ने घोषणा की कि शिवेंद्र तिवारी की पत्नी रुचि तिवारी को सरकारी नौकरी दी जाएगी। परिवार की बेटी की आजीवन पढ़ाई का खर्च उठाने और परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराने की भी घोषणा की गई। साथ ही, आरोपियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई किए जाने की बात कही गई।
अंतिम संस्कार में डिप्टी सीएम ने दिया कंधा
पीड़ित परिवार से मुलाकात के बाद डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में भी शामिल हुए। उन्होंने तीनों मृतकों के शवों को कंधा दिया। करीब पांच घंटे बाद तीनों का गुलाला घाट पर अंतिम संस्कार किया गया।
इस दौरान परिवार और स्थानीय लोगों की आंखें नम रहीं। परिजन आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे थे।
पुलिस अधिकारियों पर गिरी गाज, आरोपी का घर सील
हत्याकांड के बाद पुलिस प्रशासन ने भी कार्रवाई की। पुलिस कमिश्नर तरुण गाबा ने सआदतगंज थाने के इंस्पेक्टर संतोष कुमार आर्य और चौकी प्रभारी अजय कुमार चौरसिया को निलंबित कर दिया।
इसके अलावा, लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने मुख्य आरोपी ऋषभ शुक्ला के घर को सील कर दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस की कार्रवाई लगातार चर्चा में रही।
मुख्य आरोपी ऋषभ शुक्ला समेत छह गिरफ्तार
ताजा जानकारी के अनुसार, पुलिस ने ट्रिपल मर्डर केस में छह वांछित अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में मुख्य आरोपी ऋषभ शुक्ला के अलावा सतीश शुक्ला, गिरीश शुक्ला, दिनेश शुक्ला, प्रिया शुक्ला और अदिति शुक्ला शामिल हैं।
पुलिस ने आरोपियों के पास से अवैध पिस्टल, छह जिंदा कारतूस, छह खोखे और दो मैग्जीन बरामद करने की जानकारी दी है। इस मामले में सआदतगंज थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज है।
अब आगे क्या?
तीन लोगों की हत्या के इस मामले में छह आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटी है। परिवार को सहायता और सुरक्षा देने की घोषणाओं के बीच अब सभी की नजर जांच की प्रगति और आरोपियों के खिलाफ होने वाली कानूनी कार्रवाई पर है।
सआदतगंज का यह हत्याकांड एक बार फिर बताता है कि विवाद को समय रहते शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाना कितना जरूरी है। अब पीड़ित परिवार को न्याय मिलने और दोषियों को कानून के तहत सजा दिलाने की चुनौती पुलिस और प्रशासन के सामने है।