सड़े आलुओं के बीच तड़पती गौमाता के लिए विकास ठाकुर ने एसडीएम से लगाई दिल छू लेने वाली गुहार
आचार्य संजीव कुमार मिश्रा • बरेली, बरेली • 31/10/2026, 9:50:12 am
बरेली फरीदपुर गौमाता के प्रति श्रद्धा, सेवा और संवेदना का एक ऐसा भावपूर्ण मामला सामने आया है, जिसने इंसान और गौवंश के बीच प्रेम तथा जिम्मेदारी के रिश्ते को फिर से चर्चा में ला दिया है। तहसील फरीदपुर के प्रांगण में राष्ट्रीय गौ सेवक के रूप में सक्रिय गौ-सेवक विकास ठाकुर उपजिलाधिकारी फरीदपुर के समक्ष एक शिकायत प्रस्तुत करते हुए गौमाता के संरक्षण और उनके स्वास्थ्य से जुड़े गंभीर विषय को उठाया है। उनकी शिकायत में गौमाता के प्रति चिंता के साथ-साथ सड़क सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया है।
विकास ठाकुर का कहना है कि फरीदपुर क्षेत्र में सड़क किनारे स्थित कुछ कोल्ड स्टोरों से खराब और सड़े-गले आलू बाहर फेंके जाने के कारण आसपास का वातावरण दूषित हो रहा है। भोजन की तलाश में सड़कों के किनारे घूमने वाली गौमाताएं इन खराब आलुओं को खा लेती हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बनी रहती है।
शिकायत के अनुसार, सड़े हुए आलुओं से निकलने वाली दुर्गंध आसपास के वातावरण को भी प्रभावित करती है। वहीं, खुले में फेंके गए ऐसे खाद्य अपशिष्ट के कारण गौवंश के बीमार पड़ने का खतरा बना रहता है। विकास ठाकुर ने अपनी शिकायत के माध्यम से प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित करते हुए कहा कि गौमाता केवल एक पशु नहीं, बल्कि भारतीय समाज की आस्था, संस्कृति और संवेदना से जुड़ी हुई हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य के प्रति समाज तथा संबंधित प्रतिष्ठानों की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी चिंता जताई कि बीमार अथवा अस्वस्थ गौवंश अक्सर दर्द और कमजोरी के कारण सड़क एवं हाईवे पर बैठ जाता है। तेज गति से आने वाले वाहनों के सामने अचानक गौवंश के आ जाने से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। ऐसी घटनाओं में जहां गौमाता घायल होती हैं, वहीं कई बार वाहन चालकों और यात्रियों की जान भी संकट में पड़ जाती है। इस प्रकार गौवंश की समस्या सीधे तौर पर जनसुरक्षा से भी जुड़ जाती है।
गौ-सेवक विकास ठाकुर ने उपजिलाधिकारी से मांग की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित कोल्ड स्टोरों की जांच कराई जाए तथा यदि नियमों के विपरीत खुले स्थान पर सड़े-गले आलू अथवा अन्य अपशिष्ट फेंके जाने की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही उन्होंने ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित कराने की मांग की है, जिससे सड़क किनारे खाद्य अपशिष्ट न फेंका जाए और गौवंश को उसके कारण किसी प्रकार की हानि न पहुंचे।
विकास ठाकुर की यह पहल केवल एक शिकायत भर नहीं, बल्कि उन मूक गौमाताओं के प्रति संवेदना की आवाज है, जो अपनी पीड़ा शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकतीं। उनकी गुहार का मूल भाव यही है कि विकास और व्यवस्था की दौड़ में उन बेजुबान जीवों की सुरक्षा और सम्मान को भी स्थान मिले, जिनके प्रति समाज सदियों से श्रद्धा और करुणा का भाव रखता आया है।
अब निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि शिकायत पर प्रभावी जांच और आवश्यक कार्रवाई होती है तो इससे न केवल गौवंश के स्वास्थ्य की रक्षा हो सकेगी, बल्कि सड़क सुरक्षा, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी सकारात्मक कदम माना जाए।