हरदोई में नकली डीएपी खाद के कथित सिंडिकेट का खुलासा, 41 मीट्रिक टन खाद जब्त; दुकानदार का लाइसेंस निरस्त
विमलेश सिंह • भारत, हरदोई • 19/10/2026, 12:51:10 am
हरदोई। उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में नकली डीएपी खाद की आपूर्ति से जुड़े कथित सिंडिकेट के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। पिहानी क्षेत्र स्थित हरियाली किसान सेवा केंद्र पर एसटीएफ, पुलिस और कृषि विभाग की संयुक्त टीम की छापेमारी के बाद प्रशासन ने रविवार को संबंधित दुकानदार का लाइसेंस निरस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान ट्रेलर ट्रक से करीब 41 मीट्रिक टन संदिग्ध खाद बरामद की गई थी। मामले में आठ नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं।
14 घंटे तक चली छापेमारी
जानकारी के मुताबिक, 16 अक्टूबर को एसटीएफ, पुलिस और कृषि विभाग की संयुक्त टीम ने पिहानी क्षेत्र स्थित हरियाली किसान सेवा केंद्र पर छापेमारी की थी। करीब 14 घंटे तक चली कार्रवाई में खाद की आपूर्ति और बिक्री से जुड़े कथित नेटवर्क की पड़ताल की गई। जांच के दौरान राजस्थान में तैयार की गई संदिग्ध खाद की हरियाणा के हिसार के रास्ते आपूर्ति किए जाने की बात सामने आई।
820 बोरियों में मिली 41 मीट्रिक टन संदिग्ध खाद
कार्रवाई के दौरान संयुक्त टीम ने ट्रेलर ट्रक से 820 बोरियों में भरी करीब 41 मीट्रिक टन संदिग्ध खाद जब्त की। इनमें 600 हरी बोरियां भारत डीएपी की और 220 पीली बोरियां थीं। जब्त सामग्री को सील कर दिया गया है। खाद की वास्तविक गुणवत्ता और संरचना का पता प्रयोगशाला जांच के बाद ही चल सकेगा।
250 रुपये की लागत, किसानों को 1,350 रुपये में बेचने का आरोप
सूत्रों के मुताबिक, 50 किलोग्राम की एक बोरी संदिग्ध खाद तैयार करने की लागत करीब 250 रुपये बताई जा रही है, जबकि किसानों को इसे 1,350 रुपये में बेचने का आरोप है। यदि जांच में ये तथ्य सही पाए जाते हैं, तो किसानों को आर्थिक नुकसान पहुंचाने के साथ कृषि उत्पादन पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
रजनीश को बताया जा रहा मास्टरमाइंड
मामले में रजनीश को कथित तौर पर मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। आरोप है कि उसने अपने परिचित कुलदीप के नाम पर हरियाली किसान सेवा केंद्र का लाइसेंस बनवा रखा था। मौके पर मौजूद अखिलेश खुद को कंपनी का प्रतिनिधि बताकर माल उतरवा रहा था। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच और संबंधित साक्ष्यों के आधार पर होनी बाकी है।
राजस्थान में निर्माण, हिसार के रास्ते आपूर्ति का संदेह
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, संदिग्ध खाद की बोरियां राजस्थान में तैयार की गई थीं और इन्हें हरियाणा के हिसार स्थित एक फैक्ट्री से भेजे जाने की बात सामने आई है। टैक्स इनवॉइस पर खाद की पहचान छिपाने के लिए 'दाना' लिखे जाने का भी आरोप है। जांच एजेंसियां खाद की आपूर्ति श्रृंखला और इसमें शामिल लोगों की भूमिका का पता लगाने में जुटी हैं।
आठ नमूने प्रयोगशाला भेजे गए
संयुक्त टीम ने खाद और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स के कुल आठ नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे हैं। जिला कृषि अधिकारी डॉ. सतीश चंद्र पाठक के अनुसार, संदिग्ध खाद की गुणवत्ता और वास्तविक संरचना की पुष्टि प्रयोगशाला रिपोर्ट आने के बाद होगी।
कार्रवाई के दौरान जिला कृषि अधिकारी डॉ. सतीश चंद्र पाठक, वरिष्ठ प्राविधिक सहायक अमीनुद्दीन अंसारी और एसटीएफ निरीक्षक शैलेन्द्र कुमार सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज
मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं और आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन ने संबंधित दुकानदार का लाइसेंस निरस्त कर दिया है।
प्रयोगशाला रिपोर्ट पर टिकी नजरें: अब जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि जब्त खाद में निर्धारित मानकों का उल्लंघन हुआ था या नहीं। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई और कथित नेटवर्क की जिम्मेदारी तय की जाएगी।