75 साल की विधवा को कागजों में मार दिया गया! डेढ़ साल से भटक रही भोली, सुनिये "जिंदा" मृतक की कहानी उसी की जुबानी
सौरभ श्रीवास्तव • बेनीगंज, हरदोई • 20/10/2026, 2:32:28 pm
हरदोई: जिले में समाज कल्याण विभाग की लापरवाही और ग्राम पंचायत की मनमानी का एक ऐसा दर्दनाक मामला सामने आया है, जिसने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला, जो जिंदा है, सांस ले रही है, अपनी आंखों से इस दुनिया को देख रही है, उसे सरकारी कागजों में मृत घोषित कर दिया गया है। और इस 'कागजी मौत' की सजा वह पिछले डेढ़ साल से भुगत रही है।
पीड़िता भोली पत्नी जयराम हरदोई जनपद में अहिरोरी ब्लॉक के गोवर्धनपुर गांव की निवासी है।
उन्होंने बताया कि उन्हें पहले वृद्धावस्था पेंशन मिलती थी। पेंशन रजिस्ट्रेशन नंबर 313011939481 है। लेकिन करीब डेढ़ साल से उनकी पेंशन अचानक बंद हो गई।
जब भोली ने पता कराया तो होश उड़ गए, पंचायत सचिव ने उन्हें मृतक दिखा दिया है। यानी जो महिला आज भी अपने गांव में जिंदा खड़ी है, सरकारी रिकॉर्ड में वह कब की मर चुकी है।
भोली ने इस घोर अन्याय के खिलाफ हार नहीं मानी। उन्होंने जनसुनवाई पर संदर्भ संख्या 40015525074614 के तहत जिलाधिकारी हरदोई को प्रार्थना पत्र देकर वृद्धावस्था पेंशन दिलाए जाने और दोषियों के खिलाफ जांच कर उचित कानूनी कार्यवाही की मांग की। लेकिन सिस्टम का हाल देखिए, शिकायतें दर्ज हुए महीनों बीत गए, पर न जांच हुई, न दोषियों पर कार्रवाई, न ही भोली की पेंशन बहाल हुई।
पीड़िता भोली ने रोते हुए बताया, _"मैंने जिले में बैठे संबंधित अधिकारियों के दर्जनों बार चक्कर लगाए और उन्हें लिखित शिकायती पत्र दिए, पर आज तक समस्या का निस्तारण नहीं हो पाया। जिसके कारण मैं आज भी दर-दर भटकने को मजबूर हूं। 75 साल की उम्र में, जब उन्हें सरकार की तरफ से सम्मान और सहारा मिलना चाहिए था, तब वह ब्लॉक से लेकर जिला मुख्यालय तक फाइल लेकर घूम रही हैं। बुढ़ापे की लाठी कहलाने वाली पेंशन ही बंद कर दी गई है।
इस पूरे मामले में सबसे शर्मनाक पहलू यह है कि जब मामले संबंधी ग्राम पंचायत सचिव राम दुलारे यादव से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनका फोन नहीं उठ सका। आखिर एक जिंदा महिला को मृत दिखाने वाला जिम्मेदार अधिकारी जवाब देने से क्यों भाग रहा है? यह सवाल अब हर किसी के मन में उठ रहा है।
गांव वालों का भी कहना है कि भोली की हालत बेहद खराब है। पेंशन बंद होने से उन्हें दो वक्त की रोटी के लिए भी मोहताज होना पड़ रहा है।
अब सवाल यह है कि क्या जिलाधिकारी हरदोई इस मामले को संज्ञान में लेकर भोली को पुनः जीवित घोषित कर उनकी पेंशन बहाल करेंगे? क्या ग्राम प्रधान और सचिव के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी? या फिर यह 75 साल की बुजुर्ग महिला ऐसे ही सरकारी कागजों की मौत के बोझ तले दबकर दर-दर भटकती रहेगी?
पूरा जिला अब इस बात का इंतजार कर रहा है कि प्रशासन कब नींद से जागेगा और एक जिंदा विधवा को उसका हक वापस दिलाएगा।