हरदोई: कछौना की एक ग्राम पंचायत में करीब 7 लाख की गड़बड़ी की पुष्टि, निवर्तमान प्रधान और पंचायत सचिव को नोटिस
संपादकीय डेस्क • मुख्यालय, हरदोई • 20/10/2026, 4:29:06 pm
हरदोई। कछौना विकासखंड की ग्राम पंचायत उत्तरधैया में विकास कार्यों और भुगतान में करीब सात लाख रुपये की अनियमितता की पुष्टि हुई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी राहुल पांडेय ने ग्राम पंचायत की निवर्तमान प्रधान प्रशासक और पंचायत सचिव को नोटिस जारी कर 15 दिन के भीतर साक्ष्यों सहित जवाब मांगा है। डीएम ने चेतावनी दी है कि निर्धारित समय में जवाब न मिलने या जवाब संतोषजनक न पाए जाने पर पंचायतीराज अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।
जिलाधिकारी ने कछौना के खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) के माध्यम से दोनों को नोटिस भेजा है। जानकारी के अनुसार, कछौना के भारतखेड़ा गांव निवासी छुन्ना आदि ने ग्राम पंचायत उत्तरधैया में कराए गए कार्यों और उनके भुगतान में अनियमितता की शिकायत की थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिला विद्यालय निरीक्षक, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के सहायक अभियंता और टड़ियावां स्थित पीएम श्री इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य से जांच कराई गई।
ह्यूम पाइप खरीद में निविदा प्रक्रिया की अनदेखी
जांच में सामने आया कि ग्राम पंचायत में 22 ह्यूम पाइप की खरीद के नाम पर 1 लाख 9 हजार 400 रुपये का भुगतान किया गया। आरोपित अनियमितताओं की जांच में पाया गया कि खरीद के लिए निर्धारित निविदा प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। केवल बिल-वाउचर के आधार पर भुगतान कर दिया गया।
हैंडपंप मरम्मत के नाम पर करीब पांच लाख का भुगतान
जांच रिपोर्ट में हैंडपंपों की मरम्मत के नाम पर करीब पांच लाख रुपये के भुगतान का मामला भी सामने आया है। कुछ हैंडपंपों का रीबोर कराया गया था, लेकिन इस कार्य में भी निविदा और कोटेशन से संबंधित प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने की बात सामने आई।
रिपोर्ट के अनुसार, कार्यों के आकलन और माप पुस्तिका से संबंधित अभिलेखों के आधार पर बिल-वाउचर लगाकर भुगतान किया गया। जांच में सामने आई इन अनियमितताओं के आधार पर जिलाधिकारी ने संबंधित पक्षों से स्पष्टीकरण मांगा है।
15 दिन में देना होगा जवाब
जिलाधिकारी राहुल पांडेय ने निवर्तमान प्रधान प्रशासक और पंचायत सचिव को 15 दिन के भीतर साक्ष्यों सहित अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यदि जवाब निर्धारित समय में नहीं मिलता है या स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो पंचायतीराज अधिनियम के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल, दोनों पक्षों का जवाब और प्रशासन की ओर से आगे की कार्रवाई इस मामले में महत्वपूर्ण होगी।