यूपी चुनाव से पहले बीजेपी को संजय निषाद की दो टूक! बोले- आरक्षण दो, वरना दूसरा दरवाजा देखेंगे
संपादकीय डेस्क • मुख्यालय, नई दिल्ली • 21/10/2026, 10:45:23 pm
दिल्ली के महासम्मेलन में सहयोगी दल के तेवर तल्ख, मछुआरा समाज के आरक्षण पर जल्द फैसला लेने की मांग; बोले- निषाद पार्टी के बिना सत्ता अधूरी
दिल्ली। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी के सहयोगी दल निषाद पार्टी ने आरक्षण के मुद्दे पर अपने तेवर सख्त कर दिए हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद ने दिल्ली के तालकटोरा में आयोजित महासम्मेलन में बीजेपी को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि मछुआरा समाज के आरक्षण पर जल्द फैसला लिया जाए, अन्यथा पार्टी दूसरे राजनीतिक विकल्पों पर विचार कर सकती है।
संजय निषाद ने गठबंधन में समर्थन को आरक्षण के मुद्दे से जोड़ते हुए कहा, “साथ तभी देंगे, जब आरक्षण की बात होगी। बीजेपी को जल्द निर्णय लेना होगा। निर्णय नहीं हुआ तो दूसरा दरवाजा देखेंगे।” उनके इस बयान को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी पर दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
आरक्षण के मुद्दे पर आर-पार के संकेत
महासम्मेलन में संजय निषाद ने आरक्षण लागू नहीं होने की स्थिति में बीजेपी को राजनीतिक नुकसान होने की चेतावनी भी दी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से संघर्ष के लिए तैयार रहने का आह्वान किया और कहा कि जिस दिन जनता कुछ करने पर उतारू होगी, उस दिन पसीना छूट जाएगा।
उनके बयानों से साफ संकेत मिला कि निषाद पार्टी मछुआरा समाज के आरक्षण की मांग को आगामी चुनाव में प्रमुख मुद्दा बनाने की तैयारी में है।
बीजेपी और सपा को लेकर भी किया बड़ा दावा
संजय निषाद ने अपने संबोधन में निषाद पार्टी की राजनीतिक अहमियत का जिक्र करते हुए दावा किया कि उनके दल के बिना सत्ता का समीकरण अधूरा है। उन्होंने कहा कि बीजेपी और समाजवादी पार्टी, दोनों ही निषाद पार्टी का साथ चाहती हैं।
उनके इस बयान ने प्रदेश की राजनीति में गठबंधन के समीकरणों और निषाद समाज के समर्थन को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।
अब बीजेपी के फैसले पर टिकी निगाहें
विधानसभा चुनाव से पहले सहयोगी दल की ओर से इस तरह की चेतावनी बीजेपी के लिए राजनीतिक चुनौती बन सकती है। अब देखना होगा कि बीजेपी मछुआरा समाज के आरक्षण की मांग पर क्या रुख अपनाती है और संजय निषाद की ‘दूसरा दरवाजा’ वाली चेतावनी केवल दबाव बनाने की रणनीति साबित होती है या आने वाले दिनों में गठबंधन की राजनीति में कोई नया मोड़ आता है।