योगी का बड़ा बयान: ‘2017 से पहले यूपी में था रूल ऑफ माफिया, अब लागू है रूल ऑफ लॉ’
संपादकीय डेस्क • मुख्यालय, लखनऊ • 17/10/2026, 1:47:10 pm
लोहिया विधि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में बोले मुख्यमंत्री—अन्याय के सामने चुप रहना विकल्प नहीं; युवा अधिवक्ता संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करें, एआई के दौर में भी मानवीय विवेक जरूरी
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में ‘रूल ऑफ माफिया’ की स्थिति थी, जबकि उनकी सरकार ने प्रदेश में ‘रूल ऑफ लॉ’ यानी कानून का शासन स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था में सुधार से प्रदेश की छवि बदली है और विकास व निवेश के लिए बेहतर माहौल तैयार हुआ है। कोई भी व्यक्ति या पद संविधान से ऊपर नहीं हो सकता।
मुख्यमंत्री शनिवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ के पंचम दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने मेधावी विद्यार्थियों को पदक प्रदान किए और युवा अधिवक्ताओं से न्याय, सत्य तथा संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहने का आह्वान किया।
अन्याय के सामने चुप रहना विकल्प नहीं
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवा अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि जब उनके सामने अन्याय हो, तो चुप रहना कोई विकल्प नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि न्याय की लड़ाई में सिद्धांतों से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। इतिहास अपना फैसला सुनाएगा, लेकिन उस फैसले के पक्ष में बहस करने की जिम्मेदारी अधिवक्ताओं की होगी।
उन्होंने 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि यह तारीख लोकतंत्र के इतिहास में महत्वपूर्ण है। आपातकाल ने कानून के शासन और शासक के शासन के बीच का अंतर स्पष्ट किया। उन्होंने न्यायमूर्ति एचआर खन्ना की असहमति का उदाहरण देते हुए कहा कि सिद्धांतों के पक्ष में लिया गया निर्णय व्यक्ति को इतिहास में विशेष स्थान दिलाता है।
सत्य और निरंतर अध्ययन को बनाएं जीवन का आधार
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को संस्कृत सूत्र ‘सत्यं वद, धर्मं चर, स्वाध्यायान्मा प्रमदः’ का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि सत्य बोलना, धर्म के मार्ग पर चलना और निरंतर अध्ययन करना अधिवक्ता के जीवन का आधार होना चाहिए। इन सिद्धांतों को केवल अपने चैंबर की दीवारों तक सीमित न रखें, बल्कि अपने आचरण में उतारें।
डॉ. राम मनोहर लोहिया के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि एक अच्छे विधिवेत्ता में शिव जैसा मस्तिष्क, कृष्ण जैसा हृदय और राम जैसा वचन होना चाहिए। उन्होंने युवा अधिवक्ताओं से गांवों में जमीन और पारिवारिक विवादों के समाधान में भी योगदान देने की अपील की।
2047 तक विकसित भारत के संकल्प में युवाओं की भूमिका
मुख्यमंत्री ने विकसित भारत की परिकल्पना को एक मुकदमे के रूप में प्रस्तुत करते हुए कहा कि 140 करोड़ देशवासियों के इस संकल्प की पैरवी तथ्यों, साक्ष्यों और ईमानदारी के आधार पर करनी होगी। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में युवा अधिवक्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश को वर्ष 2029-30 तक एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए कार्ययोजना तैयार की गई है। प्रदेश के विकास में कानून के शासन, बेहतर प्रशासन और युवाओं की सक्रिय भागीदारी की अहम भूमिका है।
एआई के इस्तेमाल में मानवीय विवेक जरूरी
तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते प्रभाव पर मुख्यमंत्री ने कहा कि एआई काम को आसान बना सकती है, लेकिन अंतिम निर्णय इंसान के विवेक से ही लिया जाना चाहिए। कानूनी मसौदे में लापरवाही किसी निर्दोष व्यक्ति की स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकती है।
उन्होंने डीपफेक और साइबर अपराधों को न्याय व्यवस्था के सामने उभरती चुनौतियां बताया। मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रदेश के सभी 75 जिलों में साइबर थाने और 1,583 थानों में साइबर हेल्प डेस्क स्थापित हैं। इसके साथ ही ‘एआई प्रज्ञा’ कार्यक्रम के माध्यम से 10 लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ बोले—उपाधि मंजिल नहीं, नई यात्रा की शुरुआत
समारोह में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि डिग्री प्राप्त करना मंजिल नहीं, बल्कि एक नई यात्रा की शुरुआत है। शिक्षा की वास्तविक परीक्षा विश्वविद्यालय से बाहर शुरू होती है। किसी व्यक्ति की सफलता का आकलन इस बात से होना चाहिए कि वह दूसरों के जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव लाता है।
उन्होंने विद्यार्थियों से संवैधानिक मूल्यों, करुणा और संवेदनशीलता को अपने जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की। वहीं, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली ने विश्वविद्यालय के योगदान की सराहना करते हुए विश्वास जताया कि यहां से शिक्षित विद्यार्थी न्यायपालिका, विधि शिक्षा और लोकसेवा में उच्च मानकों को आगे बढ़ाएंगे।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अमर पाल सिंह ने बताया कि संस्थान ने अपने 20 वर्षों के सफर में उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों की न्यायिक सेवाओं को 250 से अधिक अधिकारी दिए हैं। उन्होंने कहा कि विधि शिक्षा का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सफलता हासिल करना नहीं, बल्कि समाज सेवा और वंचित वर्गों के कल्याण में योगदान देना भी है।
रुपाली जायसवाल और तेजस्वनी कौशल को स्वर्ण पदक
दीक्षांत समारोह में एलएलएम की छात्रा रुपाली जायसवाल को स्वर्ण पदक, चित्रा सिंह को रजत और सौम्या गिरी को कांस्य पदक प्रदान किया गया। वहीं, एलएलबी ऑनर्स में तेजस्वनी कौशल ने स्वर्ण, ईशा अग्रवाल ने रजत और निशा वर्मा ने कांस्य पदक हासिल किया।
ईशा अग्रवाल को क्रिमिनल लॉ में जस्टिस ओपी प्रधान मेमोरियल, कॉन्स्टिट्यूशनल लॉ में पद्मावती मोहनलाल जरीवाला और स्टूडेंट ऑफ द ईयर के लिए वीरेंद्र भाटिया स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। तान्या वर्मा को टैक्सेशन में प्रदीप कुमार अग्रवाल मेमोरियल और मालविका पचौरी को सर्वश्रेष्ठ मूटिंग के लिए केके लूथरा मेमोरियल स्वर्ण पदक मिला।
साइबर लॉ में भास्कर पांडे, जयंत अग्रवाल और चिराग निगम को क्रमशः स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक प्रदान किए गए। बौद्धिक संपदा अधिकार में आशी पांडे, रितेश मेहता और ईशा अस्थाना ने क्रमशः स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक हासिल किए। मीडिया लॉ में अंशुमान सिंह को स्वर्ण और संतुष्ट सोनकर को रजत पदक मिला।
कई प्रमुख हस्तियां रहीं मौजूद
समारोह में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली, उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, कुलपति प्रो. अमर पाल सिंह, विभागाध्यक्ष प्रो. मनीष सिंह और कुलसचिव केशव कुमार सहित न्यायमूर्तिगण, शिक्षक, विद्यार्थी और अभिभावक उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने युवा विधिवेत्ताओं से न्याय, संविधान और नैतिकता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि कानून का वास्तविक उद्देश्य केवल मुकदमों का निपटारा नहीं, बल्कि समाज में न्याय और विश्वास को मजबूत करना भी है।