रावण वध से गूंजा फरीदपुर, अगले दिन राजगद्दी शोभायात्रा में उमड़ा आस्था का सैलाब; जय श्रीराम के जयघोष से राममय हुई नगर की गलियां
आचार्य संजीव कुमार मिश्रा • बरेली, बरेली • 22/10/2026, 4:27:54 pm
बरेली/फरीदपुर मोहल्ला परा में आयोजित 189वें प्राचीन रामलीला महोत्सव का विजयादशमी पर्व धर्म, आस्था, भक्ति और उल्लास के अद्भुत संगम का साक्षी बना। विजयादशमी के अवसर पर जहां मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम और अहंकार के प्रतीक लंकाधिपति रावण के बीच अंतिम एवं निर्णायक युद्ध का जीवंत मंचन हुआ, वहीं भगवान श्रीराम के बाण से रावण का वध होते ही पूरा रामलीला मैदान ‘जय श्रीराम’ के गगनभेदी जयकारों से गुंजायमान हो उठा। इसके अगले दिन गुरुवार को भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने और राजगद्दी पर विराजमान होने की पावन स्मृति में भव्य राजगद्दी शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें नगर की गलियां श्रद्धा और भक्ति के रंग में रंगी नजर आईं।
विजयादशमी के अवसर पर रामलीला मैदान में भारी जनसैलाब उमड़ा। रामलीला मंडली बदायूं जिले के कलाकारों ने रामायण के विभिन्न प्रसंगों का सजीव एवं भावपूर्ण मंचन कर उपस्थित दर्शकों को भक्ति-रस में सराबोर कर दिया। भगवान श्रीराम और रावण के बीच हुए अंतिम युद्ध का दृश्य देखकर दर्शक मंत्रमुग्ध हो उठे। जैसे ही श्रीराम के दिव्य बाण ने रावण का अंत किया, मैदान में चारों ओर जयघोष गूंजने लगा और श्रद्धालुओं ने धर्म की विजय का उत्सव मनाया।
इसके बाद आतिशबाजी की रंग-बिरंगी रोशनी और धधकती अग्नि की लपटों के बीच रावण के विशाल पुतले का दहन किया गया। आकाश में चमकती आतिशबाजी और मैदान में उमड़ा श्रद्धालुओं का उल्लास पूरे वातावरण को अलौकिक बना रहा था। रावण के पुतले के दहन के साथ मानो अहंकार, अत्याचार और अधर्म के प्रतीक का अंत तथा सत्य, मर्यादा और धर्म की विजय का संदेश जन-जन तक पहुंचा।
रामायण के प्रमुख प्रसंगों ने बांधा श्रद्धालुओं को भक्ति के सूत्र में
रामलीला महोत्सव के दौरान कलाकारों ने लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध, संजीवनी बूटी, सीता हरण, जटायु मोक्ष, अशोक वाटिका, हनुमान संवाद, लंका दहन, कुंभकरण वध और रावण वध जैसे प्रमुख प्रसंगों का मनोहारी मंचन किया।
लक्ष्मण जी और मेघनाद के बीच हुए भीषण युद्ध तथा लक्ष्मण जी के मूर्छित होने के बाद पवनपुत्र हनुमान द्वारा द्रोणागिरि पर्वत से संजीवनी बूटी लाने के प्रसंग ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। माता सीता के हरण और उनकी रक्षा के लिए जटायु द्वारा दिए गए बलिदान की भावपूर्ण प्रस्तुति ने अनेक दर्शकों की आंखें नम कर दीं।
अशोक वाटिका में हनुमान जी और माता सीता के संवाद तथा इसके बाद स्वर्ण लंका दहन के दृश्य पर रामलीला मैदान तालियों से गूंज उठा। वहीं कुंभकरण वध और रावण वध को अधर्म पर धर्म की विजय के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया। कलाकारों के उत्कृष्ट अभिनय की दर्शकों ने जमकर सराहना की।
अगले दिन निकली भव्य राजगद्दी शोभायात्रा, पुष्पवर्षा से हुआ स्वागत
विजयादशमी के अगले दिन गुरुवार को फरीदपुर की गलियां एक बार फिर भगवान श्रीराम की भक्ति से सराबोर हो उठीं। भगवान श्रीराम की राजगद्दी शोभायात्रा को छत्रपाल सिंह दिवाकर ने हरी झंडी दिखाकर शुभारंभ कराया। इसके बाद आकर्षक झांकियों, सजे हुए रथों, धार्मिक ध्वजों और भक्ति संगीत के बीच शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से निकली।
भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण जी और पवनपुत्र हनुमान के स्वरूपों से सुसज्जित झांकियां जब नगर की सड़कों से गुजरीं तो श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया। जगह-जगह लोगों ने भगवान श्रीराम की आरती उतारी और दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरा नगर ‘जय श्रीराम’, ‘सियावर रामचंद्र की जय’ और ‘पवनसुत हनुमान की जय’ के जयघोष से गूंजता रहा।
घर-घर और प्रतिष्ठानों से श्रद्धालुओं ने झांकियों पर पुष्प बरसाए। महिलाओं ने मंगलगीत गाकर प्रभु का अभिनंदन किया, जबकि कई स्थानों पर श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण की व्यवस्था की गई। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में भगवान श्रीराम के राजगद्दी स्वरूप के दर्शन को लेकर विशेष उत्साह दिखाई दिया।
झांकियों में साकार हुई रामायण की दिव्य गाथा
राजगद्दी शोभायात्रा में शामिल झांकियों के माध्यम से रामायण के विभिन्न प्रसंगों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। भगवान श्रीराम के वनवास से लेकर लंका विजय और अयोध्या वापसी तक की दिव्य गाथा झांकियों में साकार दिखाई दी। आकर्षक वेशभूषा और सजीव स्वरूपों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
शोभायात्रा में शामिल श्रद्धालु भजनों और धार्मिक गीतों पर झूमते नजर आए।
ढोल-नगाड़ों और भक्ति संगीत की धुनों के बीच युवाओं तथा बच्चों में भी विशेष उत्साह रहा। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो अयोध्या की भक्ति स्वयं फरीदपुर की धरती पर उतर आई हो।
189 वर्षों की धार्मिक परंपरा ने दिया रामराज्य का संदेश
189 वर्षों से चली आ रही प्राचीन रामलीला की परंपरा फरीदपुर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। विजयादशमी पर रावण वध और अगले दिन राजगद्दी शोभायात्रा के माध्यम से अधर्म पर धर्म की विजय, असत्य पर सत्य की जीत और मर्यादा पर आधारित रामराज्य की परिकल्पना का संदेश नगरवासियों तक पहुंचाया गया।
रावण वध ने जहां अहंकार और अधर्म के विनाश का संदेश दिया, वहीं राजगद्दी शोभायात्रा ने भगवान श्रीराम के आदर्श शासन, मर्यादा, न्याय और लोककल्याण की भावना को जनमानस के सामने प्रस्तुत किया।
सुरक्षा व्यवस्था के बीच शांतिपूर्ण रहा आयोजन
विजयादशमी मेले और राजगद्दी शोभायात्रा में उमड़ी भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस एवं स्थानीय प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया। प्रमुख मार्गों और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर पुलिसकर्मी तैनात रहे तथा अधिकारियों ने लगातार व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
श्रद्धालुओं की सुविधा, भीड़ नियंत्रण और यातायात व्यवस्था को लेकर भी आवश्यक इंतजाम किए गए। पुलिस एवं प्रशासन की सतर्कता के चलते दोनों आयोजन शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुए।
प्राचीन रामलीला कमेटी के प्रयासों से भव्य हुआ आयोजन
189वें प्राचीन रामलीला महोत्सव को भव्य एवं सफल बनाने में प्राचीन रामलीला कमेटी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का विशेष योगदान रहा। कमेटी अध्यक्ष गोपाल मिश्रा, रमेश चंद्र शुक्ला, राजेश चंद्र मिश्रा, शिव ओम शर्मा सहित अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता पूरे आयोजन के दौरान व्यवस्थाओं में सक्रिय रहे।
कमेटी की ओर से रामलीला, विजयादशमी मेले और राजगद्दी शोभायात्रा में सहयोग देने वाले नगरवासियों, श्रद्धालुओं, प्रशासन, पुलिस एवं सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। कमेटी ने कहा कि नगरवासियों की श्रद्धा, सहयोग और सहभागिता के कारण ही वर्षों पुरानी यह धार्मिक परंपरा निरंतर भव्यता और गरिमा के साथ आगे बढ़ रही है।
रावण वध से अधर्म पर धर्म की विजय और राजगद्दी शोभायात्रा से रामराज्य की मंगलकामना—फरीदपुर की धरती पर आयोजित 189वें प्राचीन रामलीला महोत्सव ने सनातन संस्कृति, आस्था और धार्मिक परंपरा का ऐसा अनुपम रंग बिखेरा कि पूरा नगर राममय हो उठा।