भाजपा में घुटन का आरोप लगाकर धर्मेंद्र कश्यप ने छोड़ी पार्टी, 2027 से पहले रुहेलखंड में सियासी हलचल तेज; बेटी कीर्ति को बिथरी चैनपुर से चुनाव लड़ाने की चर्चा

भाजपा में घुटन का आरोप लगाकर धर्मेंद्र कश्यप ने छोड़ी पार्टी, 2027 से पहले रुहेलखंड में सियासी हलचल तेज; बेटी कीर्ति को बिथरी चैनपुर से चुनाव लड़ाने की चर्चा

बरेली उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले रुहेलखंड की राजनीति में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। आंवला लोकसभा सीट से दो बार सांसद और बिथरी चैनपुर विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक रह चुके धर्मेंद्र कश्यप ने भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक एवं सक्रिय सदस्यता से इस्तीफा देने का ऐलान किया है। उनके इस्तीफे के बाद बरेली से लेकर लखनऊ तक राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।

धर्मेंद्र कश्यप ने भाजपा संगठन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उनके खिलाफ कथित तौर पर भीतरघात करने वाले लोगों को बाद में संगठन में महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारियां दी गईं। उन्होंने पिछड़े और अति-पिछड़े समाज की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी में उन्हें घुटन महसूस हो रही थी। हालांकि, इन आरोपों पर भाजपा संगठन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है।

‘टाटा-बाय-बाय’ पोस्ट के बाद बढ़ी थीं अटकलें

धर्मेंद्र कश्यप के भाजपा से अलग होने के संकेत उनके सोशल मीडिया पर किए गए ‘टाटा, बाय-बाय’ पोस्ट के बाद मिलने लगे थे। पोस्ट सामने आने के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया था। अब भाजपा की प्राथमिक और सक्रिय सदस्यता से इस्तीफे के ऐलान के बाद इन अटकलों को और बल मिला है।

उनके इस्तीफे को वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बरेली और रुहेलखंड की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। खासतौर पर बिथरी चैनपुर और आंवला क्षेत्र में उनके पुराने राजनीतिक प्रभाव को देखते हुए उनके अगले कदम पर भाजपा और विपक्षी दलों की नजरें टिकी हैं।

2024 के लोकसभा चुनाव में भीतरघात का आरोप

धर्मेंद्र कश्यप ने भाजपा छोड़ने की वजह के तौर पर वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव का मुद्दा प्रमुखता से उठाया है। उनका आरोप है कि चुनाव के दौरान उनके खिलाफ काम करने वाले लोगों को बाद में संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गईं।

उनका कहना है कि पार्टी के लिए मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं को उचित सम्मान और जिम्मेदारी मिलनी चाहिए, लेकिन कथित रूप से उनके विरोधियों को तरजीह दिए जाने से वह आहत हुए। इसी के साथ उन्होंने संगठन में पिछड़े और अति-पिछड़े समाज की उपेक्षा का भी आरोप लगाया।

धर्मेंद्र कश्यप के मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियों में उन्हें पार्टी के भीतर काम करने में घुटन महसूस हो रही थी और इसी कारण उन्होंने भाजपा से अलग होने का निर्णय लिया।

सपा में जाने की अटकलों ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल

भाजपा से इस्तीफे के बाद अब सबसे अधिक चर्चा धर्मेंद्र कश्यप की अगली राजनीतिक पारी को लेकर हो रही है। राजनीतिक गलियारों में उनके समाजवादी पार्टी में शामिल होने की अटकलें तेज हैं।

हालांकि, अभी तक धर्मेंद्र कश्यप की ओर से सपा में शामिल होने की कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। उन्होंने समर्थकों और जनता से विचार-विमर्श के बाद अपनी अगली राजनीतिक राह तय करने की बात कही है।

ऐसे में माना जा रहा है कि समर्थकों की बैठक के बाद ही उनके अगले कदम की तस्वीर स्पष्ट हो सकती है।

बेटी कीर्ति कश्यप के चुनाव लड़ने की चर्चा

धर्मेंद्र कश्यप के भाजपा से इस्तीफे के साथ उनकी बेटी कीर्ति कश्यप का नाम भी राजनीतिक चर्चाओं में तेजी से सामने आया है। चर्चा है कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में कीर्ति कश्यप को बिथरी चैनपुर विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतारा जा सकता है।

सपा से उनकी संभावित उम्मीदवारी को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि, अभी तक किसी राजनीतिक दल की ओर से कीर्ति कश्यप को टिकट दिए जाने की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसलिए उनकी उम्मीदवारी को फिलहाल संभावित राजनीतिक संभावना के तौर पर ही देखा जा रहा है।

यदि कीर्ति कश्यप चुनावी राजनीति में उतरती हैं तो बिथरी चैनपुर विधानसभा क्षेत्र में नए राजनीतिक समीकरण बनने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

विधायक से सांसद तक रहा राजनीतिक सफर

धर्मेंद्र कश्यप का राजनीतिक सफर लंबा और उतार-चढ़ाव भरा रहा है। वह बिथरी चैनपुर विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक रह चुके हैं। वर्ष 2002 में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीता था, जबकि वर्ष 2007 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर विधायक निर्वाचित हुए।

इसके बाद उन्होंने भाजपा का दामन थामा और आंवला लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा। वर्ष 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज कर उन्होंने लगातार दो बार संसद में आंवला क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।

हालांकि, वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी नीरज मौर्य से हार का सामना करना पड़ा। अब भाजपा से इस्तीफे के बाद उनके सामने अपनी राजनीतिक जमीन और समर्थक आधार को दोबारा मजबूत करने की चुनौती होगी।

2027 से पहले बदल सकते हैं बरेली के राजनीतिक समीकरण

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। ऐसे समय में धर्मेंद्र कश्यप का भाजपा से अलग होना बरेली और रुहेलखंड की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

उनके पास बिथरी चैनपुर में पूर्व विधायक और आंवला में दो बार सांसद रहने का राजनीतिक अनुभव है। ऐसे में उनके अगले राजनीतिक कदम का असर केवल उनके व्यक्तिगत भविष्य तक सीमित रहेगा या बरेली की चुनावी राजनीति के समीकरणों को भी प्रभावित करेगा, यह आने वाला समय बताएगा।

फिलहाल धर्मेंद्र कश्यप का इस्तीफा, भाजपा संगठन पर उनके लगाए आरोप, सपा में जाने की चर्चाएं और उनकी बेटी कीर्ति कश्यप को बिथरी चैनपुर से संभावित चुनाव लड़ाने की अटकलें बरेली की राजनीति में चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं। अब निगाहें धर्मेंद्र कश्यप की समर्थकों के साथ होने वाली बैठक और उसके बाद होने वाली अगली राजनीतिक घोषणा पर टिकी है।